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दौरा एवं मिर्गी रोग

दौरे के समय जब रोगी के शरीर में अकड़न आने लगती है और मुंह से झाग निकलने लगता हैं तो लोग तरह-तरह की बाते सोचने लगते हैं। कुछ लोग मरीज को जूता सुंघाने लगते है, तो कुछ लोग इस बीमारी को भूत-प्रेत के कारण बताने लगते है। दरअसल यह कोई मानसिक रोग नहीं अपितु मस्तिष्कीय विकृति है।

“मिर्गी रोग एक साध्य बीमारी है। मिर्गी रोग से डरें नहीं, इसे समझें और इलाज कराये।”

1. परिचय:

मिर्गी रोग मानव सभ्यता की ज्ञात सबसे पुरानी बीमारियों में से एक है । लिखित भाषा में मिर्गी शब्द का उल्लेख सर्वप्रथम प्राचीन मिश्र देश के भोज पत्रों (पैपाइरस) में मिलता है। प्राचीन महान भारतीय चिकित्सा शास्त्र चरक संहिता में मिर्गी रोग का विस्तृत वर्णन मिलता है। दुनिया भर के लगभग पाँच करोड़ लोग और भारत के करीब एक करोड़ लोग मिर्गी रोग से ग्रसित हैं। लगभग 8 से 10 प्रति शत लोगों को अपने जीवन काल में एक बार दौरा पड़ने की संभावना रहती है। यह एक आम बीमारी है जो लगभग सौ लोगों में से एक को होती है। 17 नवम्बर को विश्व भर में “विश्व मिर्गी दिवस” का आयोजन होता है। इस दिन तरह-तरह के जागरूकता अभियान और उपचार कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

2. दौरा एवं मिर्गी रोग क्या है?

मिर्गी रोग एक प्रकार का मस्तिष्क विकार है, जिसमें रोगी को बार-बार दौरे पड़ते है। हमारा मस्तिष्क खरबों तंत्रिका कोशिकाओं से निर्मित है। इन तंत्रिकाओ की क्रियाशीलता ही हमारे कार्यों को नियंत्रित करती है। ये तंत्रिका कोशिकाएँ मस्तिष्क में एक दूसरे से जुडी होती है तथा आपस में विद्युत तरंगों का आदान-प्रदान करती है। जब कभी किसी कारण वश मस्तिष्क में विद्युत तरंगों का संचारण असामान्य हो जाता है, तो मरीज़ को दौरे पड़ते हैं।

3. दौरा और मिर्गी रोग में क्या अंतर है?

दौरा ज्यादातर एक बार आता है और किसी एक विशेष कारण से होता है। जबकि मिर्गी रोग में दौरे बार-बार पड़ते हैं और उनका कोई तत्कालीन कारण नहीं होता है। मिर्गी किसी एक बीमारी का नाम नहीं है। अनेक बीमारियों में मिर्गी जैसे दौरे आ सकते हैं। एक दौरे को मिर्गी नहीं माना जा सकता है। जब कम दो दौरे पड़ते है तो उसे मिर्गी कहते है।

4. दौरा और मिर्गी रोग के प्रकार

आमतौर से दौरा दो तरह का हो सकता है: आंशिक तथा पूर्ण। आंशिक मिर्गी से जहां मस्तिष्क का एक भाग अधिक प्रभावित होता है, वहां पूर्ण मिर्गी में मस्तिष्क के दोनों भाग प्रभावित होते हैं।

5. दौरा एवं मिर्गी रोग के लक्षण

मिर्गी का दौरा पड़ने पर बहुत तरह के शारीरिक लक्षण नजर आते हैं। दौरे के समय व्यक्ति का दिमागी संतुलन खो जाता है। इसका प्रभाव शरीर के किसी भी हिस्से पर देखने को मिल सकता है, जैसे हाथ-पांव में झटके आना, चेहरे का खींचना, गिर पड़ना या बेहोशी आना, इत्यादि। आमतौर पर बेहोशी की अवधि कुछ सेकंड, मिनट या घंटे तक हो सकती है। मिर्गी के दौरे सभी मरीजों में एक जैसे नहीं होते। भिन्न-भिन्न रोगियों में इसके लक्षण भी भिन्न-भिन्न होते हैं। किसी की बीमारी मध्यम होती है, तो किसी की तेज। दौरा समाप्त होने के बाद अधिकांश मरीज़ सामान्य हो जाते है।

5.1. पूर्ण दौरा के लक्षण

पूर्ण दौरे में रोगी के शरीर में खिंचाव एवं हाथ-पैर में अकड़न होने लगता है। रोगी अपने शरीर को धनुष के आकार में तान लेता है। रोगी बेहोश होकर ज़मीन पर गिर जाता है और अपने हाथ-पैरो में जोर-जोर से झटके मारता है। रोगी के हाथ-पैर मुड़ जाते हैं, गर्दन टेढ़ी हो जाती है, आंखें फटी-फटी हो जाती है, तथा उसके मुंह से झाग निकलने लगता है। कभी-कभी रोगी ज़ोर से चीखता भी है। दौरे के समय रोगी की जीभ बाहर निकल जाती है, जिसके कारण रोगी के दांतों से उसकी जीभ या होंठ के कटने एवं खून आने का भी डर रहता है। कभी-कभी दौरे के समय रोगी का पेशाब और मल भी निकल जाता है। दौरे के बाद रोगी का शरीर ढीला पड़ जाता है। आमतौर पर बेहोशी की अवधि कुछ सेकेंड, मिनट या घंटों तक हो सकती है। कुछ समय बाद जब रोगी होश में आता है, तो उसे अपने शरीर में बहुत कमज़ोरी, उलझन और थका हुआ महसूस करता है और उसके बाद रोगी को बहुत गहरी नींद आ जाती है। दौरा पड़ने के कुछ घंटे बाद रोगी को बेहतर अनुभव होने लगता है, लेकिन दौरे का असर एक हफ्ते तक रह सकता है।

5.2. आंशिक दौरा के लक्षण

  • एक तरफ के चेहरे की मांसपेशियां खिंच जाना
  • शरीर के किसी एक अंग में झटके आना

6. दौरा या मिर्गी रोग होने के मुख्य कारण क्या हैं?

  • दौरा या मिर्गी रोग कई कारणों से हो सकता है। ज्यादातर मामलों में कारण अज्ञात हैं।
  • सिर में चोट लगने से
  • अत्यधिक शराब का सेवन करने से
  • अत्यधिक तंबाकू का सेवन करने से
  • नशीली दवाओं के सेवन से
  • कार्बन मोनोऑक्साइड के विषाक्तता के कारण
  • ड्रग एडिक्शन से
  • कुछ दवाइयों का दुष्परिणाम से जैसे की एन्टीडिप्रेसेन्ट के ज्यादा इस्तेमाल से
  • दिमागी बुखार
  • स्त्रियों में मासिक के समय
  • खून में ग्लूकोज़ (शुगर) की मात्रा कम हो जाना
  • ब्रेन स्ट्रोक
  • ब्रेन ट्यूमर
  • पैतृक (वंशानुगत/अनुवांशिक): मिर्गी का रोग उन बच्चों को भी हो सकता है जिनके माता-पिता पहले इस रोग से पीड़ित हो। एक प्रतिशत लोगों में यह रोग आनुवांशिक होता है।
  • टेपवर्म का संक्रमण: आंतों में पाए जाने वाले फीता कृमि (टेपवर्म) के संक्रमण की वजह से भी दौरा हो सकता है। खुली जगह में मल त्याग करने की वजह से यह फीता कृमि साग-सब्जियों के द्वारा घरों में पहुंच जाते हैं। टेपवर्म का अंडा यदि मस्तिष्क में पहुँच जाए तो दौरे की आशंका बढ़ जाती है।
  • बिजली का झटका लगना
  • जन्म के समय शिशु के मस्तिष्क में पूर्ण रूप से ऑक्सीजन का प्रवाह नहीं होना
  • अल्जाइमर रोग

7. दौरा या मिर्गी रोग के निदान हेतु क्या परीक्षण (जाँचे) किये जाते है ?

मुख्यतः दो तरह की जाँचे आवश्यक होती है:
  1. मिर्गी के दौरे की पुष्टि करने के लिए
  2. मिर्गी के दौरे का कारण जानने के लिए
मिर्गी के दौरे की पुष्टि इलेक्ट्रोएन्सेफेलोग्राम (ई.ई.जी.) नामक जांच से की जा सकती है। मिर्गी के दौरे का कारण जानने के लिए दिमाग की कंट्रास्ट सी.टी. स्कैन या एम.आर.आई. की जांच किया जाता है।

8. दौरा या मिर्गी रोग का उपचार एवं रोकथाम (इलाज) कैसे किया जाता है ?

मिर्गी रोग साध्य है, बशर्ते इसका उपचार सही ढंग से किया जाए। रोग के लक्षण दिखते ही न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरो फिजिशियन की राय लें। इसके इलाज में धैर्य बहुत जरूरी होता है। इस रोग का उपचार लगातार कराने की आवश्यकता रहती है। न्यूरोलॉजिस्ट या न्यूरो फिजिशियन मरीज की जरूरतों के अनुसार मिर्गी विरोधी दवाइयों का प्रयोग करते हैं। यदि एक दवा का मरीज़ पर असर नहीं होता, तो दूसरी दवाइयों से उपचार करते हैं। मरीजों पर यदि ये दवाइयां असर करनी शुरू कर दें, तो रोग पर काबू पाया जा सकता है। सामान्यतः मिर्गी का रोगी 3 से 5 वर्ष तक औषधि लेने के बाद स्वस्थ हो जाता है, परंतु यह सिर्फ ७० प्रतिशत रोगियों में ही संभव हो पाता है। अन्य ३० प्रतिशत रोगियों में दौरे पर काबू पाना मुश्किल होता है। किसी भी दवा का असर न होने पर शल्य चिकित्सा भी की जा सकती है।

9. यदि किसी रोगी को दौरा पड़े तो उस समय आसपास के लोगों को क्या करना चाहिए?

  • यदि आपके आस-पास किसी व्यक्ति को दौरा पड़े, तो निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
  • शांत रहे
  • चोट पहुंचा सकने वाले सामान जैसे की टेबल, कुर्सी, चाकू, इत्यादि को मरीज के आस-पास से हटा दे, ताकि मरीज के गिर जाने पर कोई चोट न लगे।
  • मिर्गी के झटकों के दौरान व्यक्ति को ढीला रखे।
  • रोगी ने जो कपड़े पहन रखे हों उन्हें ढीला कर देना चाहिए और एक तरफ करवट लिटा देना चाहिए। मरीज के गले के पास के और अन्य तंग कपड़ों को ढीला कर दे। इससे दौरे में यदि मरीज़ को उल्टी या मुंह से झाग निकलता है तो वह सांस की नली में नहीं जा पाएगा। पीड़ित व्यक्ति को एक (दाई या बाई) ओर घुमाए ताकि उसके मुंह में कोई द्रव हो तो वह सुरक्षित तरीके से बहार निकल जाए
  • जब रोगी व्यक्ति को मिर्गी रोग का दौरा पड़े तो दौरे के समय रोगी के मुंह में रूमाल या कपड़ा लगा देना चाहिए ताकि उसकी जीभ न कटे।
  • बेहोशी की अवस्था में मुंह में पानी या अन्य कोई तरल पदार्थ डालना भी खतरनाक हो सकता है। जबरन मरीज का मुंह खोलकर उसमें कुछ डालने की कोशिश न करें
  • दौरा खत्म हो जाने पर मरीज को देखे की उसमें असमंजस के लक्षण तो नहीं है
  • मरीज चाहे तो उसे सोने दे या आराम करने दे

10. मिर्गी रोग से जुड़ी भ्रांतिया

  • मिर्गी से पीड़ित लोग मानसिक रूप से कमजोर होते हैं।
  • मिर्गी के रोगी शादी के लिए अयोग्य होते हैं।
  • मिर्गी से पीड़ित महिलाओं के बच्चे नहीं हो सकते।
  • मिर्गी का इलाज जादू - टोना है।
  • विवाह मिर्गी का इलाज है।
  • मिर्गी का दौरा पड़ते समय रोगी को जोर से पकड़ लेना चाहिए।
  • मिर्गी में जूता, प्याज सूंघना चाहिए या हाथ में चाभी देनी चाहिए।
  • मिर्गी में मरीज के मुंह में चम्मच देना चाहिए।
  • मिर्गी का दौरा सामाजिक कलंक है।
  • मिर्गी का दौरा छुआछूत से फैलता है।
  • मिर्गी भूत प्रेत के कारण होती है।

11. मिर्गी रोग से जुड़े विश्व प्रसिद्ध लोग

  • अल्फ्रेड नोबेल
  • जॉन्टी रोड्स
  • जूलियस सीजर
  • सिकन्दर
  • अगाथा क्रिस्टी

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