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न्यूरोलॉजी क्या है?

न्यूरोलॉजी (स्नायु-विज्ञान) क्या है? न्यूरोलॉजी, चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा है, जिसमे तंत्रिका संबंधी रोगों का उपचार किया जाता है। तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) मस्तिष्क (ब्रैन), मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) और इनसे निकलने वाली तंत्रिकाओं (नर्व्स) से बना होता है। तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय का कार्य मुख्यतया मस्तिष्क तथा मेरुरज्जु के द्वारा किया जाता है। न्यूरोलॉजिस्ट (स्नायु-विशेषज्ञ) कौन होता है? न्यूरोलॉजी चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने वाले विशेषज्ञ को न्यूरोलॉजिस्ट कहा जाता है। न्यूरोलॉजिस्ट मस्तिष्क, मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड), नस (नर्व्स) और उनसे संबंधी रोगों का उपचार करता है। न्यूरोलॉजिस्ट को पूरे ध्यान से रोगी के रोग से जुड़े इतिहास (मेडिकल हिस्ट्री) का अध्ययन करना पड़ता है। मरीज के सही रोग को पहचानने एवं उचित उपचार के लिए उस रोग के लक्षणों का बारीकी से विश्लेषण करना होता है। कई जाँचें (डायग्नोस्टिक टेस्ट) जैसे कि - मस्तिष्क का सी.टी. स्कैन या एम.आर.आई. तथा एलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम्स (ई.ई.जी.), इत्यादि सही रोग को पहचानने मे मदद करती है। न्यूरोलॉजिस्ट मेडिकल हिस्ट्री,
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दौरा एवं मिर्गी रोग

दौरे के समय जब रोगी के शरीर में अकड़न आने लगती है और मुंह से झाग निकलने लगता हैं तो लोग तरह-तरह की बाते सोचने लगते हैं। कुछ लोग मरीज को जूता सुंघाने लगते है, तो कुछ लोग इस बीमारी को भूत-प्रेत के कारण बताने लगते है। दरअसल यह कोई मानसिक रोग नहीं अपितु मस्तिष्कीय विकृति है। “मिर्गी रोग एक साध्य बीमारी है। मिर्गी रोग से डरें नहीं, इसे समझें और इलाज कराये।” 1. परिचय: मिर्गी रोग मानव सभ्यता की ज्ञात सबसे पुरानी बीमारियों में से एक है । लिखित भाषा में मिर्गी शब्द का उल्लेख सर्वप्रथम प्राचीन मिश्र देश के भोज पत्रों (पैपाइरस) में मिलता है। प्राचीन महान भारतीय चिकित्सा शास्त्र चरक संहिता में मिर्गी रोग का विस्तृत वर्णन मिलता है। दुनिया भर के लगभग पाँच करोड़ लोग और भारत के करीब एक करोड़ लोग मिर्गी रोग से ग्रसित हैं। लगभग 8 से 10 प्रति शत लोगों को अपने जीवन काल में एक बार दौरा पड़ने की संभावना रहती है। यह एक आम बीमारी है जो लगभग सौ लोगों में से एक को होती है। 17 नवम्बर को विश्व भर में “विश्व मिर्गी दिवस” का आयोजन होता है। इस दिन तरह-तरह के जागरूकता अभियान और उपचार कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। 2

पार्किंसन रोग

  लघुकथा एक परिवार में 65 साल का एक आदमी रहता था। उसके हाथों में कुछ महीनों से कम्पन होने लगा था। उसकी चलने की तीव्रता धीरे-धीरे काम हो रही थी। चलते समय उसको ऐसा लगता था, मानो वह जमीन से चुम्बक की तरह चिपक गया हो। समय के साथ धीरे-धीरे उसको खाते एवं पीते समय गले में फंदा लगने लगा था। उसके घर वाले उसकी परेशानी को उसे बढ़ती उम्र की वजह से बता कर टाल देते थे। एक दिन उसके पास के चिकित्सा शिविर में न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर से मुलाकात हुआ। उस डॉक्टर से मिलने के बाद व्यक्ति को पता चला कि वह पार्किंसन रोग से पीड़ित है और इस बीमारी का इलाज है। वह नियमित रूप से डॉक्टर के बताये हुए दवाइयों का सेवन करता रहा और कुछ ही दिन में अपने आप को पूरी तरह से पहले जैसा स्वस्थ अनुभव करने लगा। पार्किंसन रोग क्या है? हमारे मस्तिष्क की कोशिकाओं में डोपामाइन नाम का रसायन बनता है। यह शरीर के विभिन्न अंगों के चाल को समन्वित करने में सहयोग करता है। पार्किंसंस रोग, मस्तिष्क की डोपामाइन रसायन बनाने वाली तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करता है। जिसके कारण मस्तिष्क में डोपामाइन रसायन की मात्रा कम हो जाती। पार्किंसन बीमारी के क्या

भूलने की बीमारी (डिमेंशिया रोग) क्या होता है?

  भूलने की बीमारी (डिमेंशिया रोग) क्या होता है? समाज में डिमेंशिया बीमारी प्रायः भूलने की बीमारी को समझा जाता है। पर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि, डिमेंशिया बीमारी कई लक्षणों का समूह है, जिसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार की समस्याएं हो सकती है। हमारे समाज में ज़्यादातर लोग इस बीमारी को उम्र बढ़ने के कारण समझते हैं, और इसको बुढ़ापे का नतीजा समझते हैं। ज्यादातर डिमेंशिया बड़ी उम्र के लोगों में होता है, पर याद रहे, डिमेंशिया कम आयु में भी हो सकता है। डिमेंशिया बीमारी के क्या-क्या लक्षण हो सकते है? कौन से व्यक्ति में कौन से लक्षण नज़र आयेंगे, यह इस बात पर निर्भर है कि उनके मस्तिष्क के किस हिस्से में हानि हुई है। किसी रोगी मे कुछ लक्षण नज़र आते हैं, तो किसी में कुछ और। जैसे कि, कुछ रोगियों में भूलना इतना प्रमुख नहीं होता, जितना कि व्यवहार में परिवर्तन। डिमेंशिया बीमारी के कुछ प्रमुख लक्षण निम्न प्रकार से है: हाल में हुए नयी बातों को याद करने में दिक्कत आना (याददाश्त का कम होना) व्यक्तित्व के व्यवहार में बदलाव आना या व्यक्तित्व का अजीब तरह से पेश आना चाल और संतुलन में बदलाव आना बोलने एवं समझने में दि

Secrets of Healthy & Happy Life

We are shaped by our thoughts; we become what we think. When the mind is pure, joy follows like a shadow that never leaves. Those whose minds are shaped by selfless thoughts give joy when they speak or act. Enthusiastic people are the ones who actually get things done in this world. Enthusiasm is what turns any idea into reality. And enthusiasm is linked closely with happiness. The seven blunders that human society commits and cause all the violence: wealth without work, pleasure without conscience, knowledge without character, commerce without morality, science without humanity, worship without sacrifice, and politics without principles. Taking control of your well being is of utmost importance because the soundness of your body and mind is your most valuable asset. A sign of wholeness in your body and mind is shown in your vitality and high energy level to accomplish any task or goals. You can improve or maintain your personal well being by practicing some common sense: 1

Patient Care

Introduction The neurophysician (neurologist) is able to treat disorders of brain, spinal cord and peripheral nerves. Now a days advance research in the field of neurology provide cutting-edge treatments for the patient. Patient Care Plan The neurology center should provide a unique blend of personalized care and cutting-edge research. Neurologist, rehabilitation center and nursing staff should be well trained for neurology patient care. This integrated approach is instrumental for the improving outcomes in the treatment of Parkinson's disease, multiple sclerosis (MS), stroke, Alzheimer’s disease, and other neurological disorders. Neurology Center The Center should be composed of a multidisciplinary team of medical doctors including neurologists, neurosurgery, psychiatrists and physician. Using an innovative, integrated approach to brain and behavior, the Center focuses on optimizing cognitive performance, including comprehensive diagnosis and customized manageme